कहावत है"अप्पन हारल और बहुअक मारल" कोई किसी नही बताता। " भीतर के मार खायल वो ही जाने जो खाया है!""जा हो बूड़बक मेहरारु से हार गये!"माना जाता है कि महिलाएं शारीरिक बल मे कमजोर होती है पर यह " अर्धसत्य " है, ओमपुरी वाला नही! तस्वीर का दूसरा पहलू भी है जो " महिला सशक्तिकरण" के "लहालोट " मे गंवई बिजली के बल्ब की तरह भुकभुका रहा है।सो काल्ड मर्दवादी समाज मे " पत्नी पीड़ित" मुखर और संगठित नही है।है तो ये विमर्श टाइप का विषय पर किसी" सो काल्ड वाद" न जुड़ पाने और किसी "दल "का समर्थन न मिल पाने के कारण " नेपलिया ट्रेन" की भांति धुकधुका कर चल रहा है।काफी पहले से ही कुछेक मर्द अपनी पत्नियों द्वारा प्रताड़ित होते आ रहे हैं। कहने का यह तात्पर्य कदापि नही है कि मर्द स्त्रियों पर जुल्म नही करते! बल्कि क्विंटल के भाव मे " महिला उत्पीड़न" हो रहा है पर क्या इससे महिलाओं को भी " टिट फार टैट" का लाइसेंस मिल जाता है? बेचारे इन पत्नी पीड़ितों के सूखे और उतरे चेहरों को देखो! क्या तुम्हें इनके ...
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अनारकली --मिथक या हकीकत
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अभी कुछ दिन पहले जी फाइव की बेव सीरिज "ताज- डिवाइडेड बाई ब्लड" देख रहा था। कहानी मुगल बादशाह अकबर और उसके तीनों बेटों की है। जाहिर जब अकबर के बड़े बेटे सलीम का जिक्र आएगा तो अनारकली की भी चर्चा अवश्य होगी। लेकिन आम प्रचलित कथाओं के विपरीत इसमें अनारकली को अकबर की बीबी और बेटे दानियाल की मां के रूप मे दिखाया गया है। सलीम और अनारकली की प्रेम दास्तान में सलीम को यह नहीं मालूम है कि अनारकली उसकी सौतेली मां है और जब यह उसे मालूम होता है तो वह उससे रिश्ता खत्म करने जाता है, उसी समय साजिश का शिकार होकर अकबर द्वारा पकड़ लिया जाता है। अकबर द्वारा चुपके से देश निकाला देने के बाद अनारकली अपने बेटे दानियाल के हाथों मारी जाती है। हालांकि लोगों की नजर में यही है कि अनारकली को दीवार में चुनवा दिया गया था। मुद्दा यह है कि क्या यह इतिहास के साथ छेड़छाड़ है या, वास्तविक इतिहास को सामने लाया गया है। अनारकली कौन थी, वह थी भी या नहीं? अकबर और सलीम से उसका क्या रिश्ता था? यह बहस का मुद्दा हो सकता है। लेकिन अनारकली की ऐतिहासिकता को लेकर यह तथ्य ध्यातव्य है कि समकालीन किसी भी इतिहासकार या लेखक ने उस...
क्या गंगा नदी का अस्तित्व खतरे में है
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कुछ साल पहले ऑस्ट्रेलियाई एफ एम रेडियो के आर जे काइली सेंडीलैंड्स ने गंगा नदी के बढ़ते प्रदूषण की चर्चा के क्रम में इसे कचराघर कहकर भारतीयों को भड़का दिया था। भारतीय आस्था के प्रतीक पावन गंगा के बारे में इस अनुचित टिप्पणी का इतना विरोध हुआ कि उन्हें आखिरकार माफी मांगनी पड़ी। हालांकि काइली द्वारा भारतीय जनमानस को ठेस पहुंचाना गलत था लेकिन दूसरे दृष्टिकोण से सोचें तो जिस संदर्भ में सैंडीलेंड्स ने यह टिप्पणी की थी , क्या वह ग़लत थी ? क्या वाकई में अपने बढ़ते प्रदूषण और सूखते जल के कारण गंगा आज सचमुच नाले में परिवर्तित नहीं हो रही है? आज गंगा गंभीर संकट से गुजर रही है। इसका अस्तित्व खतरे में है। यदि गंगा में प्रदूषण इसी तरह बढ़ता रहा और सरकार इसे संरक्षित करने का कोई कठोर उपाय नहीं करती है, तो संभवतः पचास वर्ष बाद गंगा नदी किताबों के पन्नों में सिमटी नजर आये अर्थात् गंगा नदी का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा। स्थिति यह है कि एक रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में गंगा नदी घाट से लगभग सात से दस फ़ीट अंदर की ओर खिसक गयी है। दशाश्वमेध घाट से गंगा नौ फीट, राजघाट से सात फ़ीट और अ...
स्त्री स्वतंत्रता
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स्त्री स्वतंत्रता का विमर्श काफी पुराना है। स्त्रियां अपने अधिकार और समानता के लिए निरंतर संघर्ष करती रही है और बड़े शहरों में वो सफल भी हुई है। सामाजिक विकास के तीन स्तरो गांव,छोटे और मध्यवर्गीय शहर तथा मेट्रो शहर मे तीन अलग अलग समाज और स्त्रियो की स्थिति दिखलाई पडती है। हरेक स्तर के स्त्रियों की स्थिति, लड़ाई का स्तर, सोच में अंतर है। मेट्रो शहरों मे पिंक रिवोल्युशन है अर्थात् स्त्रियां स्वतंत्र है तो गांवो मे अभी भी खाप पंचायत है। स्त्री स्वतंत्रता की जब हम बात करते हैं तो मध्यमवर्गीय स्त्री की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। मेट्रो शहर की स्त्रियां पुरुषों के समकक्ष या कहीं कहीं उनसे आगे निकल चुकी है और गांवों में उन्होंने अपनी यथास्थितिव स्वीकार कर ली है। आज भी पुराने पितृसत्तात्मक कानूनों की चक्की में पिसते रहने के लिए उन्होंने स्वयं को ढाल लिया है। लेकिन मध्यमवर्गीय स्त्री पेंडुलम बनी बैठी है। तमाम सुविधाएं, कानूनी हक, शिक्षा, नौकरी के बावजूद वो बंधन से निकल नहीं पा रही हैं।स्त्री सुरक्षा के लिए बने तमाम कानूनों का पढ़ी लिखी और समर्थ स्त्रियां लाभ उठा रही है। पढे लिखे और खुले विचारो...
गांधी व्यक्ति नहीं विचार हैं
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महात्मा गांधी प्रासंगिक रहे है और रहेंगे। वस्तुत: अहिंसा का कोई विकल्प नही है, परंतु सभी लोग गांधी जी के विचारों से सहमत नही थे। जब नाथूराम गोड़से ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या की तो वह भागा नही बल्कि आत्मसमर्पण किया क्योंकि उसने गांधी को नही बल्कि उनके विचारो को मारने का प्रयास किया था, उनके विचारों को चुनौती दी थी। संभव है यदि गांधीजी की हत्या नही हुई होती तो शायद वो इतने अनुकरणीय न होते, क्योंकि मरने के बाद सिर्फ अच्छाईयां ही रह जाती है। अगर वो जिन्दा रहे होते तो संभव है कि उनकी चारित्रिक कमियां सामने आती जाती और तब शायद उस इंसान का महात्मा या भगवान मे परिवर्तन मुश्किल होता । हरेक आदमी में अच्छाई-बुराई दोनों होती है, जाहिर है मोहनदास करमचंद गांधी भी इससे परे नहीं थे। गोडसे मानता था कि गांधी जी की अहिंसा हिन्दुओं को कायर बना देगी। जैसे कि आज हिन्दूवादी कहते हैं कि इसी तरह हिन्दुओं मे परिवार नियोजन और मुसलमानों मे जनसंख्या वृद्धि होती रही तो मुस्लिम एक दिन यहाँ भी बहुसंख्यक हो जायेंगे। गांधीजी की हत्या करने के पीछे गोडसे के अपने तर्क थे , जिसको वह सही ठहरा...
चैट जीपीटी--आर्टिफीशियल इंटलिजेंस
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फेसबुक पर एक पोस्ट थी कि "भविष्य अर्थात दो सौ साल बाद रहनेवाले इंसानों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मध्य प्रेम पर एक कहानी लिखने के लिए उसने chatgpt को कहा और मिनटों में 1000 शब्दों की एक कहानी उसके सामने थी।" आखिरकार यह chatgpt क्या बला है जो मिनटों में 1000 शब्दों की कहानी लिख सकती है। यदि ऐसा है तो भला लेखक क्या करेंगे? असल में CHAT GPT एक नया टर्म है, जो आजकल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और टेक्निकल हैंड लोग तेजी से इसका प्रयोग कर रहे हैं। चैट जीपी यानि चैट जेनरेटिव प्रिट्रेंड ट्रांसफार्मर आर्टिफिशियल एक इंटेलीजेंस टूल है, जिसे दूसरा गूगल किलर भी माना जा रहा है। यह माना जा रहा है, जिस तेजी से इसके प्रयोगकर्ता बढ़ रहे है , निकट भविष्य में यह गूगल को पीछे छोड़ देगा। इसकी शुरुआत सैम अल्टमैन और एलन मस्क ने 2015 में की थी, लेकिन जल्द ही एलन मस्क ने इसे छोड़ दिया था, तब माइक्रोसॉफ्ट ने इसे अपना लिया और 30 नवम्बर 2022 को इसे एक प्रोटोटाइप के तौर पर लांच किया गया। यह सर्च बॉक्स में लिखे गए शब्दों को समझकर आर्टिकल, टेबल, समाचार लेख, क...
फिल्म समीक्षा --लाॅस्ट
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बालीवुड में बहुत कम फिल्में बनी हैं जो क्राइम रिपोर्टर द्वारा किसी अपराध की छानबीन को केंद्र बिंदु में रखकर बनाई गई है। निर्देशक अनिरुद्ध रॉय चौधरी की फिल्म "लाॅस्ट" एक महिला क्राइम रिपोर्टर द्वारा एक गुमशुदगी की कथा की तह में जाने की कहानी है। ये वही निर्देशक हैं जिन्होंने" पिंक" बनायी थी। आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रत्येक दिन लगभग 174 बच्चे गायब हो जाते हैं, यानी कि प्रत्येक आठ मिनट में एक बच्चा लापता हो जा रहा है। अधिकतर मामलों में उनके बारे में कुछ पता ही नहीं चलता। अकेले मुंबई में हर रोज 30-40 लोग लापता हो जाते हैं। कोलकाता में भी प्रत्येक महीने पांच- छह सौ लोग गायब हो ही जाते हैं। इस फिल्म की पृष्ठभूमि में कोलकाता शहर है, तो स्वाभाविक रूप से नक्सली तो होंगे ही। असल मे किसी के लापता हो जाने के पीछे की कहानी में पुलिस को सबसे कम दिलचस्पी होती है क्योंकि वो ये मानकर चलती है कि वे स्वयं कहीं भाग गये होंगे। फिल्म ‘लॉस्ट’ एक नुक्कड़ नाटक अभिनेता दलित ईशान भारती के अचानक गायब हो जाने की कहानी है जिसमें मीडिया,प्यार, बदला, राजनीति, नक्सलवाद, जातीय एंग...