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गोबर से गोवर्द्धन

एक कहावत है" बाप के नाम साग- पात आ बेटा के नाम परोर!दूसरी कहावत है " करनी कुकुर आ नाम राजा बाबू!" अर्थात नाम मे क्या रखा है? ऐसे ही नही कहा जाता । परंतु नाम मे भी बहुत कुछ है"।जन्मते ही...

रोहू माछ का मूंड़ा

"का हो भैयारी! कहाँ से भोरे भोरे लपक लिए! एतना सबेरे कौआ भी टहकार न मारा होगा और आप रोहू धर लिए!"  सोनफी झा कान से जनेऊ उतारते हुए बोले! कमलेश ठाकुर के हाथ मे लपलपाता रोहू माछ देख क...

मुझे गांधी बनना है

"तुम्हारी इतनी हिम्मत की मुझे गांधी बनने से रोको! " आइ विल फाइट फार दिस काज"! कक्का जोरों से  बड़बड़ा रहे थे "मैने बचपन से सपने देखे हैं! तख्त बदल दो ताज बदल दो"!.नारे ऐसे नही लगाये हैं। नया इतिहास लिखना है, इतिहास बदलना है। सारे मानक ध्वस्त होंगे, नये मानको के बीच चमकता हमारा चेहरा होगा जो चांद पर बैठे अंतरिक्ष यात्री को भी दिखेगा"! मै पूछूंगा" कैसा दिखता है मेरा हिन्दोस्थान"! वो पलट कर आह्लादित होकर बोलेगा" सिर्फ आप ही आप दिखाई पड़ते हो, यहाँ से। चाहे एफिल टावर हो, दुबई बुर्ज हो या चीन की दीवार, सब पर आपका ही अक्स है, आपके ही चर्चे हैं, तब मै खुश हो जाऊंगा। "कक्का !लगता है कि आप पगला गये हैं ! ये क्या बके जा रहे हैं! ये किसके बारे मे बोल रहे हैं"! चंदेसर ने टोका।पर काका आज तो अपनी ही रौ मे थे। सबेरे सबेरे भांग का दू गोला पानी के साथ गटक लिए थे। भोले बाबा का बैताल पचीसी अपना रंग दिखा रही थी। "मै लडूंगा, कामन काज के लिए लड़ूंगा। तुम मुझसे मेरे लड़ने का अधिकार नही छीन सकते। बिना लड़े तो इतिहास नही बदल सकता न! तुम मुझसे मेरे एक...

साहब ड्यूटी कटवा दो

अभी हाल मे " न्यूटन" फिल्म को चुनाव कराने मे पोलिंग पार्टी के समक्ष आने वाली समस्याओं को उठाने के लिए काफी सराहा गया है। साहब! किसी तरह ड्यूटी कटवा दो! यह फेमस लाइन होता है सबकी जुबान पर ! पर क्यों न हो भला जब इतनी जटिल और रिस्की प्रक्रिया हो चुनाव करवाने की। पहले तो पार्टी जाते ही गांव के सम्मानित लोग आवभगत मे लग जाते थे।" अतिथि देवो भवः " के साथ साथ चुनावी लाभ के लिए मेल मिलाप भी जरूरी था। पर अब आयोग ने गांव का पानी पीना भी निषिद्ध कर दिया है।चुनाव चाहे वो नगरीय हो या ग्रामीण ,अभीतक पंचायती चुनाव बैलेट पेपरों के माध्यम से संपन्न हो रहे हैं। बड़े बड़े बक्सो को लादकर ले जाना और उसमे वोटिंग कराकर फिर लादकर लाना एक जटिल कार्य है।  चुनावों मे एक दिन किसी अनजान जगह पर अनजान लोगों की बनी पोलिंग पार्टी के साथ बिताना किसी के लिए एक रोमांच का काम हो सकता है पर ज्यादातर लोग यही चाहते हैं कि उनकी ड्यूटी न लगे और लग भी गई है तो अंतिम समय तक वो तमाम जुगाड़ का उपयोग कर ड्यूटी कटवाने का प्रयास करते रहते हैं।ऐन चुनाव मे पोलिंग पार्टी रवाना होने के दिन सैकड़ो के उल्टी दस्त बुखार सब च...

बाघ का नैचुरल हैबिटेट

बाघ अपने नैचुरल हैबिटेट मे भटक रहा है जिस पर इंसानों ने कब्जा कर लिया है। यह संघर्ष है जानवर और इंसान के मध्य जमीन पर कब्जा करने के लिए। अपना हक जमाने के लिए है।एक ओर इंसान अपनी शारीरिक और दीमागी शक्ति का प्रयोग करते हुए लगातार जंगलों मे हस्तक्षेप करता जा रहा है। जंगल ,नदियां, पोखरे ,तालाब पाटता हुआ उसे अपने उपयोग लायक बनाता जा रहा है। जंगली जीवों का घर द्वार सिमटता जा रहा है तो वो गांवो और खेतों की ओर निकल आता है। वन विभाग कहता है कि जंगल से सटे क्षेत्र मे गन्ने की खेती न किया जाय क्योंकि जब जानवर जंगल से निकलकर खेतों की ओर बढता है तो गन्ने के खेत उनके छुपने और निवास करने के लिए सबसे मुफीद जगह बन जाते हैं। अब जब यहाँ आसानी से इंसान, बकरी, भैंस ,गाय आदि उसे खाने को मिल जाय तो भला वो वापस जंगल मे क्यों जाय? वैसे भी कहा जाता है कि जब बाघिन बच्चों को जन्म देती है तो उनकी जान बचाने के लिए जंगल से दूर निकल आती है। नदी किनारों की झाड़ियां उनके लिए सुरक्षित स्थान हैं। जिन क्षेत्रों मे आजकल बाघ टहलते दिखाई पड़ रहे हैं वो क्षेत्र आज से सौ डेढ सौ साल पहले जंगल हुआ करते थे अर्थात बाघों के पूर्वजों ...

भंसाली का जौहर प्रेम

" खामोशी " से देवदास बनाने वाले भंसाली श्री " हम दिल दे चुके सनम " जैसी प्रेम कहानी बनाये तो तो कभी "गोलियों की रासलीला" करते करते अब इतिहास मे " ई एच कार" की तरह यूं घुस गये हैं कि कभी ...

असुरक्षा का भाव

वो रोज सुबह सबेरे आता और गेट के पास आकर फर्श पर बैठ जाता ! " ऐ बाबू! कुछ खाने को दे दे!" दो तीन बार घंटी बजाने पर हरिया डंडा लिए गलियाते निकलता! " भागते हो कि नही! हरामी कहीं के! रोजाना दिमाग चाटने चले आते हो सबेरे सबेरे!" वो सहम जाता और उसकी कातर आंखें तलाशती रहती अम्मा के लिए! उसे शायद पता था कि यदि अम्मा सुन लेगी तो जरूर उसके लिए कुछ लेकर आएगी! हरिया गेट खोलकर दौड़ाता। वह भी तेजी से रोते भागता पर थोड़ी दूर जाकर रुक जाता! जहाँ से वो गेट देख सके कि अम्मा आ रही है कि नही! हरिया जहाँ अंदर वापस आकर गेट बंद करता वो फिर गेट के पास आकर जोर चिल्लाता ताकि अम्मा सुन ले। अम्मा जब भी सुन लेती थी घर मे रात का बचा रोटी सब्जी प्लास्टिक के थैले मे लाकर उसे दे देती थी। इतना ही नही हरिया को डांट भी देती थी। " मालकिन! आप इन सबको मुंह मत लगाया करिए! सब साले चोर है! जासूसी करने आते हैं!" " चुप रहो! तुमको तो सब चोर ही दिखाई पड़ता हैं ! बेचारा भूखा रहता है! जहाँ आस होती है वहीं पर आएगा न! सबेरे सबेरे किसी को खाली हाथ लौटाना नही चाहिए! कौन जाने किस रुप मे भगवान आ जाये...