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नरक यात्रा

कहते हैं भोगा हुआ यथार्थ जब लेखनी के माध्यम से कथाओं मे उतरता है तो वह बहुत ही मारक होता है। डा. ज्ञान चतुर्वेदी जी का उपन्यास" नरक यात्रा" सरकारी हस्पतालों का कठोर यथार्थ है, जहाँ हस्पतालों और डाक्टरों का काला पक्ष खुलकर सामने आ जाता है। उपन्यास मे लेखक ने मुर्दाघर, आपरेशन थियेटर से लेकर, ओपीडी और रसोईघर तक, नर्स, वार्डव्याय, एंबुलेंस चालक, जूनियर डाक्टर से लेकर सर्जन तक के चरित्र, कुटिलता, मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने की प्रवृत्ति को निर्ममता पूर्वक उकेरा है। उसपर से हस्पताल की अंदरुनी राजनीति, लूटखसोट, भ्रष्टाचार, नर्सों के यौन शोषण इत्यादि के बारे मे भी जमकर लिखा है। लेखक चुंकि स्वयं एक डाक्टर हैं ,इसलिए उन्होंने अनेक जगहों पर डाक्टरों के मध्य बहस मे मेडिकल टर्म्स का प्रचुरता से उपयोग किया है, जो उपन्यास के प्रवाह को धीमा करता है।उन्होंने यह भी दिखाया है कि ये बड़े बड़े जो सेमीनार होते हैं, बस खानापूर्ति किए जाते हैं। मरीजों को दिए जानेवाले खाने की बनने, बांटने और मरीजों द्वारा उसको भी किसी भी तरह पा लेने की होड़, यह दर्शाती है कि नरक मे भी ठेलमठेल है। उपन्यास का सबसे महत...

पटना ब्लूज... समीक्षा

लेखक अब्दुल्लाह खान का उपन्यास " पटना ब्लूज" एक मुस्लिम लड़के के अधूरे ख्वाबों की दास्तान है, जिससे समाज, परिस्थितियों और संबंधित व्यक्तियों के प्रति मंद मंद विषादपूर्ण संगीत प्रवाहित होता है। "ब्लूज" का शाब्दिक अर्थ होता है एक प्रकार का मंद विषादपूर्ण संगीत, जो नाम को कैची बनाता है लेकिन कथानक का कंटेंट तो मायने रखता ही है।ऐसे समय मे जब एक बार फिर से हिंदू -मुस्लिम विमर्श अपने चरम पर है, "पटना ब्लूज" एक मुस्लिम नौजवान की विवाहित हिन्दू महिला से प्रेम की दास्तान सुनाती है। वास्तव मे यह अस्सी और नब्बे के दशक के देश के महत्त्वपूर्ण घटनाओं को मुस्लिम नजरिए से देखने का प्रयास भर है। इंदिरा गांधी की हत्या, बाबरी मस्जिद प्रकरण, मुंबई बमकांड, भाजपा का उदय, मंडल कमीशन आरक्षण विवाद मे मुस्लिम समाज का पक्ष है। नायक और नायक परिवार एक लिबरल मुस्लिम समाज से ताल्लुक रखता है परंतु समाज का मुस्लिमों के प्रति अविश्वास, नौकरी और अन्य जगहों पर अपने को मुस्लिम होनेके कारण दोयम समझे जाने की मानसिकता को इसमे बखूबी दर्शाया गया है। एक किशोरावस्था से युवा बन रहे लड़के की अपोजिट सेक्...

एक लड़की पानी पानी की समीक्षा

लेखक रत्नेश्वर सिंह का नवीनतम उपन्यास "एक लड़की पानी पानी"  पर्यावरण संकट को केंद्र मे रखकर रचा बुना गया है, जिसे एक लड़की "श्री" की  कहानी के जरिए कहा गया है। एक ऐसी लड़की, जो बिहार जैसे कट्टर जातीय समाज के सबसे निचले तबके से आती है, लेकिन अपनी प्रतिभा, सोच ,मेहनत और अद्भुत विचारों की बदौलत जल संकट संबंधी विश्वस्तरीय सम्मेलन मे भारत का प्रतिनिधित्व करती है, इतना ही नही ग्लोबल जल संकट पर रिसर्च पर शोध कार्य करनेवाले इंस्टीट्यूट मे काम करने विदेश तक जाती है।। मानव जाति को जल के आसन्न संकट से बचाने के लिए उसके "नदान- नदीली प्रोजेक्ट" और "श्रीस्त्र "यंत्र के निर्माण सदृश शोध भले ही अभी हाइपोथेटिकल लगे परंतु लेखक ने इसके माध्यम से इस दिशा मे एक राह दिखाई है। रत्नेश्वर सिंह की " रेखना मेरी जान" और" एक  लड़की पानी पानी" की विषयवस्तु को देखकर ऐसा लगता है कि पर्यावरण संकट पर उपन्यास लिखनेवाले वो संभवतः वर्तमान मे एकमात्र लेखक है। उपन्यास  का पहला चैप्टर ही लोमहर्षक है जिसमे भविष्य की कठोर सच्चाई से रुबरु कराया जाता है" लाल लाल पानी...

पहाड़ों मे ट्रैफिक जाम

"हुस्न पहाड़ों का, क्या कहना कि बारहों महीने यहाँ मौसम जाड़ों का" ये फिल्मी गाने कभी हकीकत हुआ करते थे पर अब किस्से कहानियों का हिस्सा बनकर रह गये हैं।"आओगे जब तुम साजना, अंगना फ...

आपका रसिया

आपसबको फिल्म पाकीजा के वो मशहूर ट्रेन वाली सीन तो याद होगी !" आपके पांव खूबसूरत हैं, इसे जमीन पर मत रखिएगा, मैले हो जायेंगे!और दास्तान शुरू हो गई थी।" आपका रसिया"  उपन्यास मे भी द...

जनता स्टोर

लेखक नवीन चौधरी के उपन्यास" जनता स्टोर"  के नाम से  प्रथमदृष्टया यह लगता है कि जैसे किताब का केंद्रबिंदु  कोई फेमस बुक स्टोर होगा, जो युनिवर्सिटी के पास राजनीतिक हलचलों का ...

रुममेट्स

"रुममेट्स"या रुमपार्टनर तो जानते ही होंगे आप? सबके रहे होते हैं, चाहे आप हास्टल मे रहकर पढ़े हों, दिल्ली, इलाहाबाद, पटना, लखनऊ कहीं भी नौकरी की तैयारी किए हों या नौकरी का शुरुआती ...